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रुद्राक्ष भगवान शिव के नेत्र से उत्पन्न हुए हैं, जिसे शिव का ही स्वरूप माना गया है,

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खण्डवा//देवझिरी जिले में चल रही महाशिवपुराण में 8 जनवरी को कथा के द्वितीय दिवस में पंडित ललित किशोर दाधीच जी ने कहा कि, रुद्राक्ष भगवान शिव के नेत्र से उत्पन्न हुए हैं, जिसे शिव का ही स्वरूप माना गया है, इसमें औषधीय गुण है, ज्ञान भी है,धारण करने का अति लाभ है 21000 रुद्राक्ष शिवलिंग का प्रतिदिन अभिषेक हो रहा है जिसके ललाट में तिलक गले में रुद्राक्ष कंठ में ओम नमः शिवाय मंत्र होता है, वह स्वयं शिव का मंदिर ही माना गया है शिव तीर्थ का वर्णन एवं शिवलिंग प्रकट का चरित्र सुनाया,महाशिवरात्रि जागरण करना चाहिए यह हमारे जीवन के मंगलसूत्र हैं सुहागन नारी के गले में मंगलसूत्र ना हो अशुभ माना गया है जितने भी व्रत और त्योहार है यह मनुष्य के मंगलसूत्र है रक्षक है धनपति कुबेर भंडारी का चरित्र विस्तार से सुनाया गया, ग्रामीण अंचल से उमड़ रही भीड़ ने श्रवण लाभ लिया कथा प्रतिदिन 12 से 4बजे तक रहती है।

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